Pariksha Pe Charcha 2025 : Pariksha Pe Charcha: दीपिका पादुकोण जब भी अवसर पाती हैं, मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता फैलाने में सक्रिय रहती हैं। ‘परीक्षा पे चर्चा 2025′ के दूसरे एपिसोड में, उन्होंने बच्चों के साथ मेंटल हेल्थ और डिप्रेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर बातचीत की और उन्हें उपयोगी टिप्स भी दिए।
दीपिका पादुकोण को अक्सर मेंटल हेल्थ पर चर्चा करते हुए देखा जाता है। ‘परीक्षा पे चर्चा 2025’ के दूसरे एपिसोड में भी उन्होंने बच्चों के साथ इस विषय पर बातचीत की। पूरा एपिसोड रिलीज किया जा चुका है, जबकि 11 फरवरी को इसका एक प्रोमो भी शेयर किया गया था। दीपिका ने खुद इस एपिसोड का एक वीडियो साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के सभी सवालों के बेहद सरल और प्रभावी तरीके से जवाब दिए।
दीपिका पादुकोण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह बच्चों के साथ एक गतिविधि में भाग लेती नजर आ रही हैं। इस दौरान सभी बच्चों को पेन और पेपर दिए जाते हैं और उनसे अपनी एक खास ताकत लिखने के लिए कहा जाता है। अगर किसी के पास एक से ज्यादा मजबूत पक्ष हैं, तो वे उन्हें भी लिख सकते हैं। इसके बाद, सभी बच्चे अपनी लिखी हुई स्ट्रेंथ को एक–एक करके सामने लगे बोर्ड पर चिपकाते हैं।
Pariksha Pe Charcha 2025 : बच्चों के साथ दीपिका ने की खास एक्टिविटी
इस गतिविधि में दीपिका खुद भी शामिल होती हैं और अपनी एक स्ट्रेंथ लिखती हैं। उन्होंने बच्चों को इसका महत्व समझाते हुए बताया कि इस एक्सरसाइज का मकसद केवल अपनी ताकतों पर ध्यान केंद्रित करना है, न कि अपनी कमजोरियों पर। इससे आपको एहसास होगा कि आप कितनी चीजों में अच्छे हैं। इसी वीडियो को शेयर करते हुए दीपिका ने कैप्शन में लिखा, ‘परीक्षा पे चर्चा’ सीजन 8। इस अनुभव ने मुझे देश–विदेश के छात्रों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने, मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा करने और एक छात्र के रूप में अपनी यात्रा साझा करने का अवसर दिया।
दीपिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए लिखा कि इस उद्देश्य के प्रति आपकी प्रतिबद्धता के लिए आभार। दीपिका अक्सर मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करती हैं, जब भी उन्हें मौका मिलता है। इस एपिसोड में उन्होंने यह भी साझा किया कि पहली बार उन्हें तब अहसास हुआ कि वह डिप्रेशन में हैं, जब उनकी मां घर पर नहीं थीं और उनकी जीने की इच्छा खत्म हो गई थी। वह अकेले में खूब रोया करती थीं। हालांकि, उन्होंने डिप्रेशन से लड़कर इसे हराया और इसके बारे में खुलकर बात करना शुरू किया, साथ ही लोगों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अहम टिप्स भी देने लगीं।